वाल स्ट्रीट जरनल में प्रकाशित लेख में कैरीन एलियोट ने लिखा है कि जब सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान मशहूर पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या में लिप्त हो गए तो राष्ट्रपति ट्रम्प ने उनका भरपूर साथ दिया मगर इसके बावजूद बिन सलमान ने तेल का खेल शुरू करके पूरे अमरीकी तेल उद्योग और अमरीकी हितों को ख़तरे में डाल दिया। यही नहीं अपने क़रीबी घटक ट्रम्प को भी बहुत बड़े संकट में ढकेल दिया है जो दोबारा राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए हाथ पांव मार रहे हैं।
बिन सलमान ने मार्च में तेल की मंडियों को अतिरिक्त तेल की सप्लाई से भर देने का फ़ैसला किया ताकि रूस पर दबाव पड़े। ठीक उसी समय कोरोना वायरस की महामारी फैल गई और पूरी दुनिया में लाक डाउन का सिलसिला शुरू हो जाने से ईंधन की डिमांड ख़त्म हो गई। तेल की क़ीमत शून्य से भी 37 डालर नीचे चली गई।
ट्रम्प ने हस्तक्षेप करके सऊदी अरब और रूस को तेल उत्पादन कम करने पर तैयार किया मगर फिर ओपेक प्लस की ओर से जो फ़ैसले किए गए वह बेअसर रहे क्योंकि दुनिया भर में तेल की डिमांड कम रहने की वजह से क़ीमतें ऊपर नहीं आ सकीं।
अब जैसे जैसे एक एक दिन गुज़र रहा है ट्रम्प और बिन सलमान दोनों के लिए ख़तरा बढ़ता जा रहा है। दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश की अमरीका की पोज़ीशन ध्वस्त होती जा रही है और साथ ही ईंधन के क्षेत्र में अमरीका की आत्म निर्भरता भी समाप्त हो रही है। दूसरी ओर सऊदी अरब अपूर्व आर्थिक संकट में फंस गया है क्योंकि तेल की क़ीमतें तीस डालर प्रति बैरल के आसपास पहुंचकर टिक गई हैं। इस संकट की घड़ी में अमरीका भी उसकी कोई मदद नहीं कर सकता।
पिछले हफ़्ते ट्रम्प ने बहुत प्रभावी चाल चली और सऊदी अरब से सैनिक और पैट्रियट मिसाइल बाहर निकालने का एलान कर दिया। सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर होने वाले बड़े मिसाइल व ड्रोन हमलों के बाद अमरीका ने यह वायु रक्षा सिस्टम सऊदी अरब भेजा था। ट्रम्प के एलान के एक ही दिन बाद बिन सलमान ने तेल का उत्पादन और भी कम कर देने का एलान किया।
इस समय जो संकट है उसके कारण सितम्बर महीने में अमरीका में शेल आयल के उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आ सकती है। जबकि सऊदी अरब के सामने संकट ज़्यादा बड़ा है उसे भारी बजट घाटे का सामना है। सऊदी अरब के लिए बजट घाटे से बचने के लिए ज़रूरी है कि तेल की क़ीमतें 80 डालर प्रति बैरल रहें और इसकी संभावना दूर दूर तक नज़र नहीं आती।
अब ट्रम्प ने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ घातक खेल शुरू कर दिया है। सऊदी अरब से सैनिक और पैट्रियट मिसाइल निकालने का मतलब यह है कि केवल ट्रम्प प्रशासन ही नहीं बल्कि पूरी रिपब्लिकन पार्टी ने सऊदी अरब का समर्थन बंद कर देने का फ़ैसला किया है।
टेक्ज़ास के सांसद टेड क्रूज़ ने सऊदी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप हमारे साथ दुशमनों जैसा बर्ताव कर रहे हैं तो हम भी दुशमनों वाला रवैया अपनाने जा रहे हैं।
सऊदी अरब के लिए ज़रूरी हो गया है कि तेल का उत्पादन कम करे क्योंकि एक तो मार्केट में तेल की भरमार है और ख़रीदार नहीं मिल रहे हैं। दूसरी बात यह है कि अमरीका का समर्थन न रहने की स्थिति में सऊदी सरकार ख़तरे में पड़ गई है। तीसरी बात यह है कि ट्रम्प के चुनाव जीतने की संभावना कम हो गई है यानी डेमोक्रेट उम्मीदवार के जीतने की संभावना बढ़ी है और डेमोक्रेट्स यह ठान कर बैठे हैं कि सऊदी अरब को सज़ा ज़रूर देनी है और तेहरान से रिश्ते बढ़ाने हैं। वैसे यह अलग बात है कि अमरीकी रेड कार्पेट पर ईरान के राष्ट्रपति क़दम रखेंगे या नहीं इसका फ़ैसला ईरानी नीति निर्धारक करेंगे।
स्रोतः वाल स्ट्रीट जरनल+पार्स टुडे